नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी भूमि पर करीब 1.67 लाख अवैध कब्जों को हटाने के मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत के इस आदेश से हिमाचल प्रदेश में फिलहाल सरकारी भूमि से अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई पर रोक लग गई है। न्यायाधीश विक्रम नाथ और न्यायाधीश संदीप मेहता की खंडपीठ ने राज्य सरकार की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई करते हुए विवादित संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया और दूसरे पक्ष पूनम गुप्ता व अन्य को नोटिस जारी किया है।
राज्य सरकार की ओर इस याचिका को दायर करने में हुई देरी को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने देरी को माफ करने के आवेदन को मंजूरी दे दी। खंडपीठ ने प्रदेश सरकार को अंतरिम राहत देते हुए निर्देश दिया है कि अगले आदेश तक विवादित संपत्ति के संबंध में आज जैसी स्थिति है, दोनों पक्षों की ओर से वही यथास्थिति बनाए रखी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को पहले से लंबित एक अन्य समान मामले में विशेष अनुमति याचिका (सिविल) संख्या 30494/2025 के साथ संलग्न करने का आदेश दिया है, ताकि दोनों मामलों की सुनवाई एक साथ की जा सके।
यह है पूरा मामला
यह मामला मूल रूप से हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की ओर से 5 अगस्त 2025 को पारित सीडब्ल्यूपी 1028/2002 पूनम गुप्ता मामले में दिए गए अंतिम फैसले से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने मामले में हिमाचल प्रदेश भू-राजस्व अधिनियम की धारा 163-ए को असांविधानिक करार देते हुए सरकारी भूमि पर किए गए अवैध कब्जों को हटाने का आदेश दिया था। कोर्ट ने सरकार को तय समय सीमा के भीतर कार्रवाई पूरी करने के आदेश भी दिए थे। हाईकोर्ट का मानना था कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों को नियमित करने का प्रावधान कानून के अनुरूप नहीं है और इससे अतिक्रमण को बढ़ावा मिलता है। हाईकोर्ट के इसी फैसले को चुनौती देते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार और अन्य विभागों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश से फिलहाल विवादित जमीन या संपत्ति पर किसी भी तरह के बदलाव या निर्माण पर रोक लग गई है।
वर्ष 2002 में नियमितीकरण नीति के तहत मांगे थे आवेदन
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2002 में पूर्व सरकार ने नियमितीकरण नीति के तहत सरकारी भूमि पर कब्जा करने वालों से आवेदन मांगे थे। 15 अगस्त 2002 तक 1,67,339 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें 24,198 एकड़ सरकारी भूमि पर कब्जों के नियमितीकरण की मांग की गई थी। इसके बाद वर्ष 2017 में सरकार ने पांच बीघा तक सरकारी भूमि पर अतिक्रमण को नियमित करने के लिए ड्राफ्ट नियम भी जारी किए थे। हालांकि इन नियमों को अदालत में चुनौती मिलने के बाद सरकार ने स्पष्ट किया था कि उसके पास अवैध कब्जों को नियमित करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।