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तेहरान/वाशिंगटन डीसी। ईरान और अमरीका में शांति वार्ता के बीच खाड़ी क्षेत्र में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि वह लेबनान में अपने समर्थक संगठन हिजबुल्लाह की गतिविधियों पर रोक लगाए। ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अगर ईरान ने हिजबुल्लाह को नहीं रोका, तो अमरीका उस पर पिछले हफ्ते से भी ज्यादा बड़ा हमला करेगा। अमरीकी राष्ट्रपति ने साफ-साफ कहा कि अगर ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की जुर्रत की, तो उसका अस्तित्व ही संकट में पड़ जाएगा।

ट्रंप ने कहा कि आप इसे बंद करेंगे और आपके पास कोई देश नहीं बचेगा। आप अपने देश वापस भी नहीं जा पाएंगे। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि जरूरत पडऩे पर अमरीका इस रणनीतिक जलमार्ग पर पूरी तरह नियंत्रण कर सकता है। उन्होंने एक कैबिनेट बैठक के दौरान कहा कि अगर हमें जरूरत पड़ी, तो हम होर्मुज जलडमरूमध्य पर कब्जा करेंगे। अगर वे कोई समझौता नहीं करते हैं, तो हम खुद वहां से गुजरने वाले जहाजों से टोल टैक्स वसूलेंगे। ट्रंप की धमकी से पहले ईरान ने इस महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बंद करने की बात कही थी।

92 फीसदी इजरायली बोले, समझौते से ईरान को ज्यादा फायदा

अमरीका और ईरान के बीच हुए समझौते को लेकर इजरायल में हुए एक सर्वें में 92 फीसदी लोगों ने माना कि इस डील से ईरान को ज्यादा फायदा हुआ है। सर्वे के मुताबिक, बड़ी संख्या में इजरायली नागरिकों का मानना है कि युद्ध के बाद हुए समझौते में तेहरान को आर्थिक और कूटनीतिक लाभ मिला, जबकि इजरायल को अपेक्षित राजनीतिक बढ़त नहीं मिल सकी। सर्वे में शामिल 78 फीसदी लोगों ने यह भी माना कि अमरीकी राष्ट्रपति ने इस मुद्दे पर इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू को पीछे छोड़ दिया और अंतिम समझौते की दिशा तय करने में वाशिंगटन की भूमिका ज्यादा प्रभावी रही।

स्विट्जरलैंड में अमरीका और ईरान में शांति पर वार्ता

जेनेवा। स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक में रविवार को अमरीका और ईरान के बीच बातचीत शुरू हो गई है। अमरीकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने वार्ता के दौरान कहा कि पिछले कुछ घंटों में अच्छी प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि अमरीका और ईरान मिलकर शांति और समृद्धि के लिए काम कर सकते हैं। वेंस के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि दोनों देशों के रिश्तों में नया अध्याय शुरू हो और अगले 10 साल में पश्चिम एशिया की तस्वीर बदल जाए। पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में चल रही इस वार्ता का मकसद क्षेत्र में तनाव कम करना और स्थायी शांति की दिशा में आगे बढऩा है।

By admin

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