शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में पंचायतों के पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन को लेकर दायर 15 याचिकाओं पर मंगलवार को भी सुनवाई होगी। ऐसे में राज्य सरकार पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण रोस्टर मंगलवार को जारी कर पाएगी या नहीं, इस पर अभी संशय बरकरार है। सरकार मंगलवार को कोर्ट में अपना पक्ष रखेगी। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है।
राज्य चुनाव आयोग की ओर से अदालत को बताया गया कि सरकार की ओर से 13 फरवरी के बाद पुन: गठित और नवगठित पंचायतों के सीमांकन को लेकर दिए गए प्रस्ताव को सहमति दे दी गई है। आयोग ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत 31 मार्च तक हर हाल में रोस्टर जारी करना होगा। यदि सरकार इसके बाद किसी नए प्रस्ताव के लिए संपर्क करती है, तो आयोग इसकी अनुमति नहीं दे सकता है।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने दायर 15 याचिकाओं पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए मामले की सुनवाई मंगलवार के लिए रखने की मांग की, जिसे अदालत में स्वीकार कर दिया। अदालत ने पिछले आदेश में कहा था कि राज्य चुनाव आयोग की अनुमति के बिना जारी किए गए प्रस्तावों पर सरकार आगे नहीं बढ़ सकेगी। अदालत ने पाया कि हिमाचल प्रदेश पंचायत और नगर पालिका आदर्श चुनाव आचार संहिता, 2020 के प्रावधानों और 17 नवंबर 2025 की अधिसूचना के अनुसार, ऐसी प्रक्रियाओं के लिए चुनाव आयोग की अनुमति अनिवार्य है।