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शिमला। हिमाचल प्रदेश के कुल 23 में से 12 निगम व बोर्ड लाभ में हैं, जबकि 10 घाटे में चल रहे हैं। विधानसभा के चल रहे बजट सत्र में भाजपा विधायकों के संयुक्त सवाल में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने घाटे में चल रहे निगम-बोर्ड आदि के बारे में विस्तार से लिखित जानकारी दी है। ये आंकड़े 31 मार्च, 2025 तक के हैं। इनके अनुसार हिमाचल पथ परिवहन निगम 2272 करोड़ रुपए से अधिक के घाटे में है, जबकि सबसे ज्यादा 3390 करोड़ से अधिक के घाटे से राज्य बिजली बोर्ड जूझ रहा है। प्रदेश के पर्यटन और वन विकास निगम भी घाटे से अछूते नहीं हैं। हालांकि प्रदेश में कुछ निगम-बोर्ड ऐसे भी हंै, जो वर्तमान में लाभ में चल रहे हैं। कौशल विकास निगम का ब्यौरा सामने नहीं आया है। घाटे का सबसे बड़ा आंकड़ा हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड का है। बिजली बोर्ड 3390 करोड़ रुपए से अधिक के घाटे में चल रहा है।

किसी समय राज्य सरकार को कर्ज देने वाले ऊर्जा राज्य में बिजली बोर्ड का यह घाटा चिंताजनक है। यही नहीं, हिमाचल प्रदेश पावर कारपोरेशन भी 976 करोड़ रुपए से अधिक के घाटे में है। दिलचस्प तरीके से हिमाचल प्रदेश वित्तीय निगम 181 करोड़ रुपए से ज्यादा के घाटे में चल रहा है। हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम भी 147 करोड़ रुपए से अधिक के घाटे में है। हिमाचल प्रदेश वन विकास निगम की हानि का आंकड़ा 84 करोड़ रुपए से ज्यादा है। इसी प्रकार एचपी मिल्क फेडरेशन शिमला का घाटा सात करोड़ रुपए से अधिक का है। लाभ में चलने वाले निगम व बोर्डों में हिमाचल प्रदेश ऊर्जा संचार निगम, हिमुडा, भूतपूर्व सैनिक निगम, औद्योगिक विकास निगम, सामान्य उद्योग निगम, एग्रो इंडस्ट्रीज निगम, नागरिक आपूर्ति निगम, इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम, महिला विकास निगम, खादी ग्राम उद्योग बोर्ड, पिछड़ा वर्ग वित्त व विकास निगम, अल्पसंख्यक वित्त व विकास निगम शामिल हैं। इसके अलावा एचआरटीसी, बिजली बोर्ड, वन विकास निगम, पर्यटन विकास निगम, वित्तीय निगम, एससी, एसटी निगम आदि का नाम घाटे वाली लिस्ट में शामिल है। हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम के आंकड़ों का ब्यौरा सीएम की तरफ से दिए गए लिखित जवाब में नहीं है।

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