शिमला। वन अधिकार दावों के निपटारे तक वन निवासी को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। हिमाचल प्रदेश पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त निदेशक ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस स्पष्टता के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाए। हिमाचल प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को 31 दिसंबर 2020 को दी गई अपील के संदर्भ में उपरोक्त विषय का उल्लेख किया गया है। निर्देश में कहा गया है कि एक अपील अथवा हस्तक्षेप की मांग वाली याचिका के संदर्भ में स्पष्ट किया गया है कि वन अधिकार के दावे लंबित होने की स्थिति में वन निवासियों को पंचायत चुनाव लड़ने से अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता।
विभाग की ओर से जारी पत्र के अनुसार, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 की धारा 4(5) के तहत वन निवासियों के अधिकार तब तक सुरक्षित रहते हैं, जब तक उनके दावों का निपटारा नहीं हो जाता। निर्वाचन अधिकारियों को जारी पत्र में पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त निदेशक केवल शर्मा ने कहा है कि जिन लोगों ने अपने वन अधिकारों के लिए आवेदन कर रखा है, वे पंचायत राज अधिनियम 1994 की धारा 122(1)(सी) के तहत अयोग्य नहीं माने जाएंगे। विभाग ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस स्पष्टता के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।