शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को हिम बस कार्ड बनाने से रियायत देने पर सरकार विचार कर रही है। सोमवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान धर्मशाला से भाजपा विधायक सुधीर शर्मा के सवाल पर उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि निगम की बसों में सभी रियायती एवं निशुल्क श्रेणियों के यात्रियों को सुविधा प्राप्त करने के लिए हिम बस कार्ड बनाना अनिवार्य किया गया है। प्रदेश में अभी तक दो लाख हिम बस कार्ड बन चुके हैं। अमर उजाला ने 15 मार्च के अंक में हिम बस कार्ड के नाम पर विद्यार्थियों पर डाले गए अतिरिक्त आर्थिक बोझ का मामला प्राथमिकता से उठाया था।
खबर के माध्यम से बताया गया कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों को मिलने वाली निशुल्क बस सेवा 1 अप्रैल से पूरी तरह मुफ्त नहीं मिलेगी। नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को पहले 236 रुपये खर्च कर हिम बस पास बनवाना अनिवार्य होगा, तभी उन्हें मुफ्त बस यात्रा की सुविधा मिल सकेगी। सरकारी स्कूलों में पहली से बारहवीं कक्षा तक करीब 8.50 लाख बच्चे पढ़ते हैं। इनमें से लाखों विद्यार्थी स्कूल दूर होने के चलते एचआरटीसी बसों में आते-जाते हैं। अब इन्हें हिम बस पास बनवाना अनिवार्य किया गया है। पास के लिए लोकमित्र केंद्र के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया के लिए विद्यार्थियों को अतिरिक्त 40 रुपये की फीस भी देनी पड़ रही है। सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को बीते कई वर्षों से निशुल्क बस सुविधा का लाभ मिलता आ रहा है। हालांकि, अब सरकार ने इस फैसले की समीक्षा करने को कहा है।