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नई दिल्ली। संसद चलो मार्च के बाद अब कॉकरोच जनता पार्टी को तमाम विपक्षी सियासी दलों का जोरदार समर्थन मिल रहा है। समाजवादी पार्टी की नेता डिंपल यादव और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल के बाद मंगलवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस लीडर राहुल गांधी भी छात्रों की आवाज बुलंद करने प्रधानमंत्री के आवास तक पहुंच गए। राहुल गांधी मंगलवार शाम पौने चार बजे अपने सांसदों के साथ प्रधानमंत्री आवास के बाहर पहुंचे और पीएम मोदी का इस्तीफा मांगते हुए धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। उनके साथ उनकी बहन और सांसद प्रियंका गांधी के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े भी थे। पूरे तीन घंटे तक प्रधानमंत्री आवास के बाहर हाई वोल्टेज ड्रामा चला। पुलिस के जवान राहुल गांधी को हटाने की कोशिश करते रहे, लेकिन उन्होंने हटने से साफ इनकार कर दिया। सरकार ने तीन घंटे के धरने में राहुल से दो बार बातचीत की, लेकिन वे धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े रहे। इसके बाद 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी पहुंचे, तो कांग्रेसियों ने घेरा बना लिया और राहुल तक पहुंचने नहीं दिया। कांग्रेसियों और पुलिस के बीच आधे घंटे तक धक्का-मुक्की होती रही। पुलिस ने लाठीचार्ज किया। आखिर में करीब साढ़े छह बजे 12 से ज्यादा पुलिसकर्मी उन्हें उठाकर ले गए और जबरन बस में बैठाया। पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खडग़े, अखिलेश यादव समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया है। धरने पर बैठे राहुल को पुलिस उठाकर ले गई। उन्हें दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम रखा गया।

हालांकि रात दस के करीब सभी को छोड़ दिया गया। उधर, संसद के दोनों सदनों में विपक्षी सदस्यों ने नीट यूजी पेपर लीक के खिलाफ और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की बर्बर कार्रवाई के मुद्दे पर लगातार दूसरे दिन मंगलवार को भी हंगामा किया, जिसके कारण राज्यसभा और लोकसभा की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित करनी पड़ी। मंगलवार को भी संसद में कोई विधायी कामकाज नहीं हो सका। उधर, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है कि उनका संगठन अब दोबारा संसद मार्च नहीं निकालेगा। उन्हें डर है कि दोबारा मार्च निकालने पर पुलिस फिर से युवाओं को पीटेगी। उन्होंने दिल्ली में सोमवार को संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस पर बर्बरता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारी स्टूडेंट्स के साथ मारपीट की और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया। उन्होंने 12 साल की लड़कियों के सिर फोड़ दिए और ऐसा करने वाले पुरुष पुलिस अधिकारी थे। अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि पुलिस के साथ सादे कपड़ों में गुंडे थे। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों ने युवा प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट और हाथापाई की। लाठी लगने से एक लडक़ी की गर्दन पर गंभीर चोट आई है। वह लडक़ी आरएमएल अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती है। उस लडक़ी को कुछ भी होता है, तो पुलिस और सरकार जिम्मेदार होगी।

By admin

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