शिमला। हिमाचल प्रदेश में लगाए जा रहे स्मार्ट बिजली मीटरों के खिलाफ विरोध तेज होता जा रहा है। आम उपभोक्ताओं के बाद अब बिजली बोर्ड के पेंशनर और कर्मचारी भी इसके विरोध में उतर आए हैं। मुख्य अभियंता कार्यालय मट्टनसिद्ध के बाहर वीरवार को कर्मचारियों और पेंशनरों ने धरना-प्रदर्शन किया। बिजली बोर्ड हमीरपुर जोन के मुख्य अभियंता (संचालन) के जारी पत्र में बोर्ड के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के पुराने बिजली मीटरों को प्राथमिकता के आधार बदलने के निर्देश दिए गए हैं। हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष नीतीश भारद्वाज, पूर्व प्रधान कामेश्वर दत्त शर्मा, हीरा लाल वर्मा, बिजली पेंशनर्ज फोरम के वरिष्ठ उपाध्यक्ष कुलदीप खरवाड़ा ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए स्मार्ट बिजली मीटर का विरोध किया।
उन्होंने कहा कि बिजली कर्मचारी एवं अभियंता राष्ट्रीय स्तर पर स्मार्ट मीटर का विरोध कर रहे हैं। यह महंगी एवं आम जनता के लिए अनावश्यक तकनीक है। इसे प्रस्तावित बिजली संशोधन विधेयक, 2025 के माध्यम से निजीकरण एवं निजी कंपनियों के हितों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि बोर्ड प्रबंधन निजी कंपनी के हित को ध्यान में रखते हुए स्मार्ट मीटर को पूरे प्रदेश में सभी उपभोक्ताओं पर लागू कर रहा है। इससे लगभग 2500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा है। इसकी भरपाई उपभोक्ताओं से बिजली बिलों के माध्यम से की जाएगी। यूनियन एवं पेंशनर्ज फोरम ने मांग की है कि कर्मचारियों एवं पेंशनभोगियों के घरों में प्राथमिकता के आधार पर स्मार्ट मीटर स्थापित करने संबंधी भेदभावपूर्ण कार्यालय आदेश को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाए। उन्होंने बताया कि यदि बोर्ड प्रबंधन कार्यालय आदेश को वापस नहीं लेता है तो नौ मार्च को मुख्य अभियंता परिचालन धर्मशाला में विरोध में विशाल धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।