शिमला। भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता एफटीए-20 अक्तूबर से लागू होने जा रहा है। समझौते के तहत न्यूजीलैंड के 95 फीसदी निर्यात को भारत में शुल्क मुक्त या कम शुल्क पर प्रवेश मिलने की बात कही गई है। हालांकि केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार भारत ने सेब सहित संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को समझौते में सुरक्षित रखा है और इन पर न्यूजीलैंड को कोई रियायत नहीं दी गई है। सरकार के मुताबिक समझौते का लक्ष्य अगले चार से पांच वर्षों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर करीब 35,000 करोड़ रुपए तक पहुंचाना है। हिमाचल प्रदेश सहित साथ लगते उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर से भारी मात्रा में बाहरी राज्यों को सेब भेजा जाता है। ऐसे में एफटीए लागू होने से न्यूजीलैंड के सेब, कीवी सहित अन्य फ्रूट्स के दाम भी कम होंगे, जिससे हिमाचल जैसे पहाड़ी प्रदेश पर इसका व्यापक असर दिखाई देगा।
हिमाचल में हर वर्ष करीब 5500 करोड का सेब कारोबार होता है, लेकिन एफटीए लागू होने से यदि कीमतें कम होती हैं, तो इसका सीधा असर बागबानों की जेब पर पड़ेगा। हिमाचल प्रदेश सेब फल उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान का कहना है कि सेब और कीवी पैदा करने वाले बागबानों पर इस व्यापार समझौते का विपरीत असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कीवी पर पहले न्यूजीलैंड के साथ 33 प्रतिशत इम्पोर्ट ड्यूटी थी। अब यह कम होगी, तो इसका विपरीत असर पड़ेगा। पहले वर्ष में कीवी 6250 टन इम्पोर्ट होगी, वहीं छठे वर्ष में यह 15 हजार मीट्रिक टन का करोबार हो जाएगा। भारत पर इसका सीधा असर देखने को मिलेगा, क्योंकि न्यूजीलैंड में बहुत ज्यादा मात्रा में फलों का उत्पादन होता है, जबकि इसके विपरीत भारत की क्वालिटी और उत्पादन में बहुत अंतर है।
एग्रीकल्चर में नहीं होना चाहिए एफटीए
सेब उत्पादक संघ के राज्य कमेटी सदस्य संजय चौहान का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों के बागबानों को एफटीए का बडा फर्क पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में सेब के दाम प्रति किलो के हिसाब के करीब 2700 पर पेटी बेचा गया और उस दौरान सेब की फसल अच्छी थी, लेकिन अब उत्पादन जब 25 प्रतिशत भी नहीं हुआ है तथा सेब के दाम वही 2200 तक प्रति पेटी मिल रहे हैं, तो इससे बागबानों को नुकसाान हो रहा है। वहीं, जब एफटीए लागू होगा, तो इससे बागबानों को बहुत नुकसान होगा।
एफटीए लागू होने से गिरेंगे सेब-कीवी के दाम
भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष सुरेश ठाकुर ने कहा कि हिमाचल में पहले से बागबानों को क्लाइमेट चेंज से लेकर सेब में महंगी स्पे्र की मार झेल रहा है। एफटीए लागू होने से सेब के दामों में गिरावट आएगी और बागबानों को इसका भारी नुकसान होगा। उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर के बागबान भी एफटीए लाूग होने से प्रभावित होंगे। न्यूजीलैंड का सेब देश में उत्पादित होने वाले सेब अलग है। उसकी क्वालिटी भी बहुत अलग होगी।