गगरेट। हिमाचल में चिट्टे की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं, इसका बड़ा खुलासा स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की ताबड़तोड़ कार्रवाई में हुआ है। पंजाब-हिमाचल सीमा पर सक्रिय चिट्टा माफिया ने अब अपना पूरा नेटवर्क इस तरह बिछा दिया है कि पाकिस्तान सीमा से आने वाली खेप पहले पंजाब के सीमावर्ती गांवों में पहुंचती है और वहां से छोटे-छोटे पेडलरों के जरिए हिमाचल के पहाड़ी इलाकों तक पहुंचाई जाती है। शनिवार को 60.45 ग्राम चिट्टे के साथ पकड़े गए दो युवकों से मिली शुरुआती जानकारी के आधार पर एसटीएफ ने महज कुछ घंटों के भीतर पूरे बैकवर्ड लिंक का पर्दाफाश करते हुए दो और तस्करों को गिरफ्तार कर लिया। शनिवार को तलवाड़ा के दो युवकों से 60.45 ग्राम चिट्टा बरामद होने के बाद एसटीएफ ने उनसे गहन पूछताछ की। पूछताछ में मिले इनपुट इतने अहम थे कि एंटी चिट्टा टीम ने देर शाम ही तलवाड़ा से सटे हलेड गांव में दबिश दे दी।
टीम जैसे ही किराए के कमरे तक पहुंची तो वहां मौजूद दो युवकों में से एक भागने लगा, लेकिन एसटीएफ ने पीछा कर उसे कुछ ही दूरी पर दबोच लिया। तलाशी के दौरान दोनों के कब्जे से 18 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ। पूछताछ में सामने आया कि गिरफ्तार दोनों आरोपी मोहित थापर और रजनीश कुमार पंजाब के फिरोजपुर जिला के रहने वाले हैं। दोनों करीब 20 दिन पहले ही हलेड गांव में किराए का कमरा लेकर रहने लगे थे। एसटीएफ को संदेह है कि पाकिस्तान सीमा से ड्रोन के जरिए पंजाब पहुंच रही चिट्टे की खेप को पहले ऐसे सुरक्षित ठिकानों पर रखा जाता है और फिर हिमाचल में सक्रिय पेडलरों के माध्यम से आगे सप्लाई किया जाता है। नशा माफिया अब किशोरों और 19 से 20 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं का सबसे अधिक इस्तेमाल कर रहा है। कम उम्र होने के कारण इन पर आसानी से शक नहीं होता और यही वजह है कि इन्हें चिट्टे की खेप पहाड़ी क्षेत्रों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी जा रही है।
नशा तस्करों पर पुलिस की नजर
एसटीएफ की एएसपी रेणु कुमारी ने बताया कि 60.45 ग्राम चिट्टे के मामले में मिली जानकारी के आधार पर बैकवर्ड लिंक का सफलतापूर्वक पर्दाफाश किया है। कार्रवाई के दौरान दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 18 ग्राम चिट्टा बरामद किया है। इससे जुड़े किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।