शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों को शांतिपूर्ण और सर्वसम्मति से संपन्न कराने के उद्देश्य से चलाई जा रही निर्विरोध पंचायत प्रोत्साहन योजना को आगे भी जारी रहेगी। निर्विरोध पंचायत प्रोत्साहन योजना को जारी रखने के लिए पंचायती राज मंत्री ने फाइल को मंजूरी दे दी है। पंचायती राज विभाग ने इस योजना को आगामी चुनावों में लागू करने के लिए एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेजा था, जिसके बाद पंचायती राज मंत्री ने योजना को जारी रखने के लिए मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत उन पंचायत संस्थाओं को आर्थिक प्रोत्साहन दिया जाएगा, जहां सभी पदाधिकारी बिना किसी मुकाबले के निर्विरोध चुने जाते हैं। पंचायती राज विभाग का मानना है कि इससे चुनावी विवादों में कमी आती है, आपसी भाईचारा बढ़ता है और पंचायतें विकास कार्यों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर पाती हैं। वर्तमान प्रावधानों के अनुसार यदि किसी ग्राम पंचायत में प्रधान, उप-प्रधान और सभी वार्ड सदस्य निर्विरोध चुने जाते हैं, तो उस पंचायत को 10 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
वहीं, पंचायत समिति स्तर पर सभी सदस्य, चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के निर्विरोध चुने जाने पर पांच लाख रुपण् दिए जाते हैं। जिला परिषद के लिए यह राशि 15 लाख रुपए निर्धारित की गई है, बशर्ते सभी सदस्य और पदाधिकारी बिना चुनावी मुकाबले के चुने जाएं। यह राशि संबंधित पंचायत संस्थाओं को ग्रांट-इन-एड के रूप में प्रदान की जाती है, जिसका उपयोग स्थानीय विकास कार्यों में किया जा सकता है। विभागीय सूत्रों के अनुसार पिछली बार इस योजना को अच्छा प्रतिसाद मिला था और कई पंचायतों ने आपसी सहमति से निर्विरोध चुनाव करवाए थे। इससे न केवल चुनावी खर्च में कमी आई, बल्कि सामाजिक सौहार्द भी मजबूत हुआ। यही कारण है कि सरकार इस योजना को आगे भी जारी रखने के पक्ष में है।
आरक्षण रोस्टर के खिलाफ याचिका पर सुनवाई 11 मई को
शिमला — हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में पंचायती राज संस्थाओं के आरक्षण रोस्टर को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई 11 मई के लिए टल गई है। कोर्ट ने राज्य सरकार को याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों पर विस्तृत जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में पंचायती चुनाव को लेकर जारी आरक्षण रोस्टर के खिलाफ याचिकाएं दायर की गई हैं। याचिकाओं में नियमों को दरकिनार कर संबंधित सीटें आरक्षित करने का आरोप लगाया गया है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ के समक्ष इन मामलों पर सुनवाई हुई।