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धर्मशाला। नगर निगम चुनाव का बिगुल बजते ही सियासी बिसात बिछ चुकी है। 29 अप्रैल से शुरू होने वाली नामांकन प्रक्रिया से पहले भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के लिए अग्निपरीक्षा से कम नहीं हैं। 17 वार्डों वाले इस निगम चुनाव में जीत के लिए दोनों ही दल किसी भी प्रकार का जोखिम उठाने के मूड़ में नहीं हैं, यही कारण है कि जिताऊ और टिकाऊ उम्मीदवारों के चयन के लिए बंद कमरों में बैठकों का दौर आधी रात तक चल रहा है। इसे महज एक स्थानीय निकाय चुनाव नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल माना जा रहा है। भाजपा का मानना है कि सत्ता विरोधी लहर और जनता का आक्रोश उन्हें सभी 17 वार्डों में क्लीन स्वीप दिलाएगा।

कांग्रेस की ओर से एचपीटीडीसी के अध्यक्ष रघुवीर सिंह बाली और देवेंद्र जग्गी मोर्चा संभाले हुए हैं, जिनका फोकस कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बिठाकर सता के बूते नगर निगम जीतना है। दूसरी तरफ, भाजपा ने विधायक एवं प्रदेश उपाध्यक्ष पवन काजल और पूर्व मंत्री व विधायक सुधीर शर्मा जैसे कद्दावर नेताओं को कमान सौंपी है। इन दिग्गजों के लिए चुनौती यह है कि वे न केवल सही उम्मीदवार चुनें, बल्कि टिकट न मिलने से नाराज होने वाले दावेदारों को भी संभालें। अभी सडक़ से चाय की दुकानों तक अब सिर्फ एक ही सवाल है। किसे मिलेगा टिकट?

कांग्रेस का दावा, सुक्खू सरकार से जनता खुश

चुनाव से पहले ही बयानों के तीर चलने शुरू हो गए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने आत्मविश्वास जताते हुए कहा कि सुक्खू सरकार की नीतियों से हर वर्ग लाभान्वित है और 29 अप्रैल से पहले घोषित होने वाले उनके उम्मीदवार ऐतिहासिक जीत दर्ज करेंगे।

भाजपा का पलटवार सरकार ने सब ठगे

कांगड़ा भाजपा नेता एवं पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा ने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है और इस बार कांग्रेस को सबक सिखाने के लिए तैयार बैठी है। नगर निगम के इस कार्यकाल में जमकर भ्रष्टाचार हुआ है जिसका जनता हिसाब मांग रही है।

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