नई दिल्ली। एंटी पेपर लीक बिल लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी पास हो गया है। संसद की मुहर लगते ही अब यह बिल कानून बनने के राह पर है और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही यह कानून बन जाएगा। हालांकि जब सरकार की तरफ से केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह चर्चा का जवाब देने के लिए खड़े हुए तो विपक्ष वाकआउट कर गया। इससे पहले राज्यसभा में पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खडग़े ने सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थाओं पर आरएसएस का कब्जा कर लिया है। इस दौरान उन्होंने मनुस्मृति को लेकर भी बयान दिया, जिस पर सदन में हंगामा शुरू हो गया। सरकार की ओर से उनकी बयान को आशांति फैलाने वाला करारा दिया गया है। दरअसल खडग़े ने कहा कि कुछ वर्षों में 152 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं, लेकिन एक को भी सजा नहीं हुई। सरकार क्या कर रही थी, क्या एजेंसियां सो रही थीं। शिक्षा कुछ लोगों का विशेषाधिकार नहीं है। शैक्षणिक संस्थाओं पर आरएसएस का कब्जा है। यूनिवर्सिटी में आरएसएस के लोग भरे जा रहे हैं।
बजट में छह फीसदी भागीदारी शिक्षा बजट की होनी चाहिए, लेकिन तीन फीसदी से भी कम है। खडग़े ने कहा कि विश्वविद्यालयों में अच्छे शिक्षक, अच्छे वीसी आएं, लेकिन आप जो सिलेबस बदल रहे हैं, उसमें यह भी आ रहा है कि शूद्र के वेद-पाठ सुनने पर शीशे और जस्ते से उसके कान भर दिए जाएं। वेद मंत्र का उच्चारण करने पर उसकी जीभ काट ली जाए। यह आरएसएस सिलेबस है। ऐसे विचारों की निंदा करता हूं। ऐसी सामग्री को सिलेबस से हटाया जाए। खडग़े के इस बयान के बाद संसद में हंगामा शुरू हो गया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि विपक्ष के नेता ने जो कहा है, वह मेरी जानकारी में तथ्यों से परे है। अगर इस बात का कोई तथ्य है, तो वह प्रमाणित करें। वह मनुस्मृति के मूल पाठ को प्रमाणित करें। बाद में सभापति ने खडग़े की मनुस्मृति संबंधी टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से हटाने का निर्देश दिया।
लोकसभा में भी वंदे मातरम् बिल पास
नई दिल्ली। राज्यसभा के बाद गुरुवार को लोकसभा में भी विपक्ष के भारी हंगामे के बीच वंदे मातरम् बिल पास कर दिया गया है। इसी के साथ ही सदन की कार्यवाही शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। इससे पहले यह विधेयक राज्यसभा से 29 जुलाई को पारित हो चुका था। दोनों सदनों से पारित होने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही यह कानून बन जाएगा। इस बिल का मकसद यह है कि ‘वंदे मातरम्’ को भी राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ की तरह ही कानूनी सुरक्षा देना है। अगर कोई ‘वंदे मातरम्’ का अपमान करता है, तो उसे तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।