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नई दिल्ली। संसद में कई दिनों से चला आ रहा गतिरोध मंगलवार को ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा के साथ खत्म हुआ। चर्चा के लिए मिले आठ घंटे के समय में जहां सत्ता पक्ष के सांसदों ने संशोधन बिल की खूबियां गिनाईं और पंजाब में कथित पेपर लीक पर विपक्ष की चुप्पी पर सवाल उठाए, वहीं विपक्ष ने पेपर लीक पर सरकार को घेरते हुए प्रदर्शनकारी छात्रों पर किए गए अत्याचारों का मामला भी उठाया। इस दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी पर दिए गए एक बयान पर खूब हंगामा भी हुआ। दरअसल बहस के दौरान प्रियंका ने नए शिक्षा मंत्री के चयन पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने एक ऐसे व्यक्ति को चुना, जिसने एक गर्भवती रेप पीडि़ता के दोषियों की रिहाई पर सहमति व्यक्त की थी। इस बयान पर स्पीकर ने उन्हें टोका और सत्तापक्ष के सदस्यों ने जोरदार हंगामा किया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रियंका गांधी ने नए शिक्षा मंत्री पर जो टिप्पणी की, वह एक तरीके से चरित्र हनन है। इसे रिकॉर्ड से हटाया जाए। इस तरह की भाषा का इस्तेमाल न करें। उन्होंने कहा कि अगर यह बात ऑथेंटिकेट नहीं कर सकतीं तो माफी मांगनी चाहिए। इस पर प्रियंका गांधी ने कहा कि वह जोशी जी ने बिल्किस बानो के बलात्कारियों पर दिए बयान का प्रमाण भेज दूंगी।

हालांकि स्पीकर ने मामले को तूल न देते हुए बहस को आगे बढ़ाने को कहा। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला कि 2024 में कानून बनने के बावजूद अब तक पेपर लीक के किसी आरोपी को सजा नहीं मिली। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपने सलाहकार बदलने की सलाह देते हुए कहा कि सिर्फ नई कमेटियां बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। सरकार युवाओं का भरोसा केवल प्रचार या नए-नए वीडियो बनाकर नहीं जीत सकती। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को कैमरे का नहीं, दिल का एंगल बदलना पड़ेगा और युवाओं के प्रति जवाबदेही दिखानी होगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई ने सरकार की साख को नुकसान पहुंचाया है और लाठियां छात्रों की पीठ पर नहीं, सरकार की विश्वसनीयता पर पड़ी हैं। उधर, बहर से दौरान अखिलेश की स्पीच पर किरेन रिजिजू ने कहा कि अखिलेशजी तो समाजवादी हैं। मैं पूछना चाहता हूं कि छात्रों के आंदोलन के बाद सरकार बिल लेकर आती है, ये अच्छा है या आंदोलन के बाद सरकार उसे कुचलने के लिए एमरजेंसी लगा देती थी, वह अच्छा था? इस पर अखिलेश यादव ने कहा कि मैंने एमरजेंसी तो नहीं देखी, लेकिन एमरजेंसी में क्या-क्या हुआ, वह दिल्ली में भी देखने को मिल गया। याद दिला दूं कि एमरजेंसी के बाद परिवर्तन हुआ था और इस बार भी परिवर्तन होगा।

By admin

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