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6 महीने के गहन रिसर्च के बाद फार्मेसी विभाग ने बनाई दवा; यूनिवर्सिटी के फिजियोथेरेपी विभाग में इलाज के साथ मुफ्त उपलब्ध
सोलन (कालू झंडा)। अटल शिक्षा कुंज, कालू झंडा स्थित आईईसी विश्वविद्यालय (IEC University) के फार्मेसी विभाग ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विभाग के छात्रों और प्रोफेसरों ने मिलकर जोड़ों के दर्द से राहत दिलाने के लिए एक अत्यधिक प्रभावी आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन “संधि सुखा तेल” (Sandhi Sukha Oil) तैयार किया है। इसे छह महीने के गहन अनुसंधान और विकास (R&D) के बाद आधिकारिक रूप से लॉन्च किया गया है।
गठिया और मांसपेशियों की अकड़न का प्राकृतिक इलाज
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, इस तेल को विकसित करने का मुख्य उद्देश्य पुराने जोड़ों के दर्द, गठिया (अर्थराइटिस) और मांसपेशियों की अकड़न से जूझ रहे लोगों को एक सुरक्षित, प्रभावी और पूरी तरह प्राकृतिक समाधान देना था।
क्लिनिकल ट्रायल में मिले शानदार परिणाम
यह प्रीमियम आयुर्वेदिक तेल अब विशेष रूप से आईईसी यूनिवर्सिटी के फिजियोथेरेपी विभाग के माध्यम से आम जनता के लिए निशुल्क (Free) उपलब्ध कराया गया है। ट्रायल चरण के दौरान इसके बेहतरीन क्लिनिकल नतीजे देखे गए हैं। संस्थान में इलाज करा रहे मरीजों के मुताबिक, फिजियोथेरेपी सेशंस के साथ इस तेल के उपयोग से उनके दर्द में भारी कमी आई है और जोड़ों की गतिशीलता (Mobility) में तेजी से सुधार हुआ है।
आम जनता के लिए खुला आमंत्रण: विशेषज्ञों की देखरेख में होगा मुफ्त इलाज
आईईसी विश्वविद्यालय ने जोड़ों के दर्द, पीठ दर्द, घुटनों की समस्या या गठिया से ग्रसित सभी नागरिकों को परिसर में आने का खुला आमंत्रण दिया है। पीड़ित मरीज यहाँ आकर फिजियोथेरेपी विभाग के विशेषज्ञों की देखरेख में ‘संधि सुखा तेल’ का निशुल्क लाभ उठा सकते हैं।
पारंपरिक अनुसंधान और व्यावहारिक इलाज का संगम
विश्वविद्यालय के प्रवक्ता ने इस उपलब्धि पर कहा, “हमारे फार्मेसी और फिजियोथेरेपी विभागों ने मिलकर पारंपरिक अनुसंधान को व्यावहारिक मरीज देखभाल से जोड़ा है। हम जोड़ों के दर्द से परेशान सभी लोगों का स्वागत करते हैं कि वे हमारे संस्थान में आएं, विशेषज्ञों से परामर्श लें और इस प्रभावी उपचार का मुफ्त लाभ उठाएं।”
आईईसी विश्वविद्यालय अपने फार्मेसी और हेल्थ साइंसेज जैसे विभिन्न विभागों के माध्यम से लगातार ऐसे व्यावहारिक समाधान विकसित कर रहा है, जिससे स्थानीय समुदाय और समाज को सीधे तौर पर लाभ मिल सके।

By admin

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